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कुर्किहार।

कुर्किहार गाँव वजीरगंज से उत्तरपूर्व में लगभग ५ किलोमीटर और गया से २७ किलोमीटर पूर्व में स्थित है| शिलालेखों से प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार कुर्किहार प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ स्थल है|

कनिंघम ने पहले १८६१ - ६२ में और फिर १८७९ - ८० में कुर्किहार का दौरा किया| उनके अनुसार यह स्थल करीब ६०० फ़ीट वर्ग फ़ीट चौड़ा और करीब २५ फ़ीट ऊँचा था| उन्होंने यहाँ कई बौद्ध तस्वीरों, के अलावा मन्नत स्तूपों को भी देखा| उनके अनुसार , " इस स्थान का विस्तार कई सौ फ़ीट उत्तर से दक्षिण तक पंक्तिबद्ध था|" 

१९३० में कुर्किहार में २२६ कांस्य और पांच अन्य वस्तुओं का एक ढेर पाया गया , जो मुख्य टीले से उजागर किये गए थे| इनमें बुद्ध बुद्ध , बोधिउत्सव ,स्तूप, घंटिया और अनुष्ठान की हुई वस्तुएँ शामिल थी| आज इन वस्तुओं को पटना संग्रहालय में विशेष कक्ष में प्रदर्शित किया गया है|

काँसे पर कई शिलालेख मिले हैं| कुर्किहार शिलालेखों में देवपाला (८१० - ८५० ), राज्यपाला (९०८ - ९४० ),महिपाल (९८८ - १०३६ ) और विगरापाला तृतीय (१०५४ - १०७२ )का उल्लेख है , जो ९ वी शताब्दी से लेकर १०७४ ईसवी तक शासक रहे| मैथ का नाम अपनाका रखा गया था, जिसका उल्लेख कई  शिलालेखों में किया गया है| यह मठ दक्षिण भारत के कांची के आगंतुकों के बीच काफी लोकप्रिय था|

८७ तस्वीरों में से ८१ बौद्ध और ६ हिन्दुओं के थे| वे सभी एक स्थान पर पाए गए , जिसमें मिट्टी के जार में सलंग्न छोटी तस्वीरें थी | वे मुख्य टीले की सतह से करीब २५ फ़ीट नीचे मिले थे , जब इनकी कोई व्यक्ति ईंटों की खोज में यहाँ की खुदाई कर रहा था|

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