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मनेर शरीफ

मनेर शरीफ पटना से लगभग ३० किलोमीटर दक्षिण पश्चिम की ओर है | किसी समय यह सोन और गंगा नदी के संगम पर बसा हुआ था| आज का मनेर करीब दो हजार घरों का एक क़स्बा है और सड़क किनारे कुछ दुकाने हैं जिसमें दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजें मिल जाती है| यहाँ का " नुकदी का लड्डू " बहुत मशहूर है| मनेर किसी समय मुस्लिम संस्कृति का बिहार में सबसे पुराना केंद्र था| ग्यारहवीं शताब्दी में और उसके बाद भी यह सूफी फकीरों का आध्यात्मिक केंद्र बना रहा| यहाँ समूचे हिंदुस्तान से सूफी संत आया करते थे और सूफी मत के प्रसार के लिए उपाय सोचा करते थे | मध्ययुग के मुस्लिम इतिहास में मनेर का नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया गया है| आज भी मुसलमानो के दिल में इसके प्रति बहुत आदर है| साल में यहाँ दो बार दो फकीरों की पुण्य तिथि मनाई जाती है| उस समय धर्म-प्राण मुसलमानो का बड़ा मेला लगता है |

मनेर में  इस समय दो दरगाह है , बड़ी और छोटी | बड़ी दरगाह बिहार के मुसलमानी धर्म स्थानों में सबसे ज्यादा पवित्र गिनी जाती है | इसमें  महान सूफी संत हजरत मखदूम यहिया मनेरी की कब्र है| मखदूम साहब वर्ष १२९१ में मरे थे | वह हजरत ताज फकीह के पोते थे| बिहार के मुसलमान संतो के वह प्रमुख थे| देश के मुसलमान फकीरों में उनका नाम आज भी बड़े अदब से लिया जाता है|

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