पादरी की हवेली, बिहार की राजधानी पटना में स्थित एक ऐतिहासिक चर्च है, जिसे 1772 में रोमन कैथोलिक मिशनरियों द्वारा बनवाया गया था। यह बिहार का सबसे पुराना चर्च है और भारत की ईसाई विरासत का अद्भुत उदाहरण है।
इस चर्च का नाम "पादरी" (Father) और "हवेली" (भवन) के संयोजन से पड़ा है। इसकी वास्तुकला में यूरोपीय शैली की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है – ऊँची खिड़कियाँ, लकड़ी का काम और झरोखे इसकी पहचान हैं।
यह स्थल धार्मिक एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। क्रिसमस और ईस्टर के समय यह स्थल रोशनी और प्रार्थना से जीवंत हो उठता है, जब सैकड़ों लोग प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं।
पादरी की हवेली एक विशिष्ट स्थल है, विशेषकर उन पर्यटकों के लिए जो बिहार के धार्मिक विविधता और विरासत को करीब से देखना चाहते हैं।
एक नज़र में
पादरी की हवेली बिहार का सबसे पुराना चर्च है, जो 1772 से है। जेसुइट मिशनरियों द्वारा निर्मित, इसमें आश्चर्यजनक औपनिवेशिक युग की वास्तुकला है, जो इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल बनाती है।
चर्च मदर टेरेसा से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपना मिशनरी काम शुरू करने से पहले यहां प्रशिक्षण लिया था। यह एक महत्वपूर्ण ईसाई तीर्थ स्थल बना हुआ है।
यात्रा करने का सबसे अच्छा समय: सितंबर से अप्रैल।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स: मोबाइल, कैमरा, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की अनुमति है।